चिथड़ों में छिपा लाल
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चिथड़ों में छिपा लाल

गुरु-सन्देश

अपने दुःख में रोने वाले मुस्कराना सीख ले ।
दूसरों के दुःख दर्द में आँसू बहना सीख ले ।।
जो खिलाने में मजा है
वह खाने में नहीं ।
जिंदगी है चार दिन की
तू किसी के काम आना सीख ले ।।


एक १० वर्षीय बालक ने भावपूर्ण हृदय से स्कुल के बाहर भोजन करते विद्यार्थियों की एक टोली से कहा :"कल से कुछ खाया नहीं है। मुझे कुछ खाने को दे दो ।"
उनमे से महेश नाम का विद्यार्थी खाते-खाते मुँह बनाकर उसे चिढ़ाते हुए बोला :"भाग जा !"
लेकिन वह बालक फिर भी लालच भरी दृष्टि से भोजन की ओर देखता रहा।
"अरे ! तू गया नहीं,भाग जा!"- महेश ने इस बार पास में पड़े पत्थर को उठाकर उसे धमकाते हुए कहा परंतु बालक उसी अवस्था में खड़ा रहा।

महेश का गुस्सा भड़का। वह बालक को मारने के लिए उठा तो बालक भगकर कुछ दूरी पर भोजन कर रही विद्यार्थियों की दूसरी टोली के पास जा खड़ा हुआ। भिखारी बालक को देखकर उस टोली के एक विद्यार्थी ने बिना माँगे ही उसे रोटी दे दी। उसकी देखा-देखी दूसरे कुछ विद्यार्थियों ने भी उसे रोटी दी।

बालक खुश होकर,विद्यार्थियों से दूर जाकर बैठ गया और रोटी खाने ही वाला था कि अचानक एक दुबला-पतला साधु उसके पास आया एवं मूर्च्छित होकर गिर पड़ा। वह बालक रोटियाँ छोड़कर बाबा को उठाने लगा। पास में ही लगे नल से बालक ने अपनी टूटी बाल्टी से पानी भरा और बाबा के मुँह में पानी डाला। बाबा को होश आया। फिर बालक में धीरे-धीरे उठाकर उन्हें बिठा दिया।
बाबा ने कहा :"कई दिनों से अन्न का एक दाना भी पेट में नहीं पड़ा है।"

बालक अपनी रोटी ले आया और बोला

:"भूखे हो न बाबा ! लो,ये रोटियाँ खा लो।" छोटा-सा बालक जिसने पिछले दो दिन से कुछ भी खाने को नहीं मिला था,उसने अपनी रोटियाँ बाबा को दे दीं;अपने लिए रोटी का आधा टुकड़ा भी नहीं रखा।

साधु बड़े-बड़े कौर तोड़ते हुए रोटियाँ खाने लगा।
रोटियाँ खाकर तृप्त हो साधु लेट गया तथा उसे नींद आ गई। उस बालक ने नल पर जाकर पानी पिया और एक ओर चल दिया।

स्वामी शिवानंद महाराज एक ओर खड़े यह सब देख रहे थे। वे उस बालक के पास पहुँचे और उसका हाथ पकड़कर उसे गौर से देखने लगे फिर उसे गले से लगा लिया। उसकी ओर देखकर वे कुछ सोचने लगे,फिर उसके हाथ में कुछ रूपये रख दिए,
जिन्हें लेकर बालक चल पड़ा।

स्वामी शिवानन्द महाराज सोचने लगे कि जिसने बालक को रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं दिया वह अमीर बाप का बेटा महेश बड़ा कि जिसने अपनी पूरी भिक्षा उस भूखे बाबा को दे दी वह बालक बड़ा ???

लोक कल्याण सेतु/अप्रैल-मई 2006

अभिभावकों से - घर में अगर कोई मांगने वाला आये तो उसे जरूर कुछ न कुछ दें,बच्चों से दिलवायें ।
बच्चों को दरिद्र नारायण की सेवा करना सिखायें ।
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