तुम सफलता की बुलन्दियों को छू सकते हो
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तुम सफलता की बुलन्दियों को छू सकते हो

पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी का पावन संदेश 

जहाँ मन की गहरी चाह होती है, आदमी वहीं पहुँच जाता है। अच्छे कर्म, अच्छा संग करने से हमारे अंदर अच्छे विचार पैदा होते हैं और बुरे कर्म, बुरा संग करने से बुरे विचार उत्पन्न होते हैं एवं जीवन अधोगति की ओर चला जाता है।

हे मेरे विद्यार्थियो ! तुम हलके विद्यार्थियों का अनुकरण मत करना वरन् तुम तो संयमी-सदाचारी महापुरुषों के जीवन का अनुकरण करना। उनके जीवन में कितनी विघ्न-बाधाएँ आयीं फिर भी वे लगे रहे। मीरा, ध्रुव, प्रह्लाद आदि भक्तों के जीवन में कितने प्रलोभन और बाधाएँ आयीं फिर भी वे लगे रहे। हजार-हजार विघ्न-बाधाएँ आ जायें फिर भी जो संयम का, सदाचार का, सेवा का, ध्यान का, भगवान की भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ता वह जीते जी मुक्तात्मा, महान आत्मा, परमात्मा के ज्ञान से सम्पन्न सिद्धात्मा जरूर हो जाता है और अपने कुल-खानदान का भी कल्याण कर लेता है। तुम ऐसे कुलदीपक बनना। ૐ....ૐ... बल.... हिम्मत... दृढ़ संकल्पशक्ति का विकास...... पवित्र आत्मशक्ति का विकास ......ૐ.....ૐ.....

शाबाश वीर ! शाबाश.... उठो। हिम्मत करो। परमात्मा तुम्हारे साथ है, सदगुरु की कृपा तुम्हारे साथ है फिर किस बात का भय ? कैसी निराशा ? कैसी हताशा ? कैसी मुश्किल ? मुश्किल को मुश्किल हो जाये ऐसा खजाना तुम्हारे पास है। तुम अवश्य सफलता की बुलंदियों को छू सकते हो। संयम और सदाचार – ये दो सूत्र अपना लो, बस !
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