मनुष्य का चरित्र ही सबसे कीमती
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मनुष्य का चरित्र ही सबसे कीमती

पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी

स्वामी विवेकानंद अमेरिका के एक बगीचे में से गुजर रहे थे । उनको सादे कपड़ों में, बिना किसी हैट के खुले सिर देखकर लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ और वे उनका मखौल उड़ाने लगे । 
होएऽ... होएऽऽ...
होएऽऽऽ... 
करते हुए वे स्वामीजी के पीछे लग गये । 

स्वामी विवेकानंद आगे-आगे जा रहे थे और मजाक उड़ानेवाले उनके पीछे-पीछे।
थोड़ा आगे चलकर विवेकानंदजी तनिक रुके और बोले : ‘‘भाइयो ! आपके देश में इन्सान की कीमत उसके कपड़ों से होती है, किंतु मैं उस देश का निवासी हूँ जहाँ मनुष्य का चरित्र ही विशेष कीमती है । वहाँ कपड़ों की कोई कीमत नहीं है।’’ 
मजाक उड़ानेवाले लज्जित हो उठे ।

 ✍🏻आप भी अपनी कीमत कपड़ों से मत बनाइये । अपने सच्चरित्र, सदाचार, साहस जैसे सद्गुणों से सुसज्ज रहिये ।
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