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कैसा रखें बच्चे का नाम

पहले के जमाने में माता-पिता को ‘मातुश्री-पिताश्री' बोलते थे। वैसे भी ‘पिता, माता' पवित्र शब्द हैं और उनके साथ 'श्री' मिल जाता है - 'मातुश्री,पिताश्री' तो कितने पवित्रता, दिव्यता पाने वाले वचन बन जाते हैं। 'पिताश्री!' यह बोलने में हृदय पर कैसा असर होता है आप विचारो और 'डैडी, मम्मी' बोलने में...? 
 अब अपने बच्चों को कह दो कि इन फैशनेबल शब्दों को छोड़ो, 'पिताश्री, माताश्री' कहा करें। 

 आजकल बच्चे-बच्चियों के नाम भी कैसे रखते हैं बबलू, टिन्नू, मिन्नू, विक्की,श्लेष्मा...। अब श्लेष्मा तो नाक से निकली हुई गंदगी को बोलते हैं। क्या बच्चों का ऐसा गंदा नाम रखा जाता है गार्गी, मदालसा रखो, श्रीहरि, हरि शरण, प्रभु शरण, राम, श्याम, हरिप्रसाद,शिवप्रसाद रखो। श्री विष्णु सहस्रनाम में से कोई नाम रखो । ऐसे नाम रखो जिससे भगवान की याद आये और बच्चों में दैवी गुण आ जाये तथा माता पिता में उच्च विचार आ जाएं। 

 हम पाश्चात्य जगत से बहुत-बहुत प्रभावित हो गये हैं। वे तो अपने कल्चर से परेशान हैं और उनका कचरा हम ले रहे हैं। अपनी संस्कृति भूलते जा रहे हैं। नहीं, नहीं... अपनी संस्कृति अपनाओ
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