जीवन-रसायन क्रमांक-35
Next Article जीवन की सार्थकता
Previous Article नन्ही उम्र में ऐसी नियम निष्ठा

जीवन-रसायन क्रमांक-35

महात्मा वही है जो चित्त को ड़ांवांड़ोल करनेवाले प्रसंग आयें फ़िर भी चित्त को वश में रखे, क्रोध और शोक को प्रविष्ट न होने दे |

      -पूज्य संत श्री आशारामजी बापू


Next Article जीवन की सार्थकता
Previous Article नन्ही उम्र में ऐसी नियम निष्ठा
Print
36 Rate this article:
No rating

Please login or register to post comments.

Name:
Email:
Subject:
Message:
x
RSS
12345678910Last