आत्मस्थ होना
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आत्मस्थ होना

रामचन्द्रजी जिनको प्रणाम करके अपना आदर्श व्यक्त करते हैं,ऐसे वशिष्ठ जी के लिए भी लोग कुछ-की-कुछ अफवाह कर सकते हैं तो तुम्हारे लिए,तुम्हारे सद्गुरु के लिए कोई कुछ बोले तो उनके चक्कर में मत आना,तुम तो चौरासी के चक्कर को हटाकर आत्मस्थ होना,यह तुम्हारा उद्देश्य हो
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