बाल संस्कार केन्द्र' ने बदली घर की तस्वीर
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बाल संस्कार केन्द्र' ने बदली घर की तस्वीर

मैं 8वीं कक्षा में पढ़ती थी । 10 अक्टूबर 2002 को हमारे गाँव में परम पूज्य बापूजी के शिष्यों द्वारा बाल संस्कार केन्द्र की शुरुआत की गयी । जिसमें मैं,मेरी दो छोटी बहनें और मेरा छोटा भाई जाने लगे (और अभी भी लाभ ले रहे हैं) ।

 मेरे पिताजी कई वर्षों से शराब पीते थे और माँ गुटखा खाती थी तथा घर में मांसाहार भी किया जाता था । ‘बाल संस्कार केन्द्र' की शिक्षा के अनुरूप हम बच्चे सुबह-शाम प्राणायाम,ध्यान, भजन आदि करने लगे । हम भाई-बहनों ने चाय व मांसाहार का त्याग कर दिया,जिससे प्रभावित होकर पिताजी ने शराब पीना व माँ ने गुटखा
खाना छोड़ दिया एवं घर में मांसाहार भी बंद हो गया । 

22 से 24 फरवरी 2003 तक रायपुर में पूज्य बापूजी का सत्संग-कार्यक्रम हुआ । 24 फरवरी को हम सभी ने पूज्य बापूजी से मंत्रदीक्षा ली । धन्य हैं पूज्य बापूजी के शिष्य ! जो देशभर में चलाये जा रहे बाल संस्कार केन्द्रों के द्वारा पूज्य बापूजी के दिव्य संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का दैवी कार्य करके अपना समय सार्थक कर रहे हैं ।
- इन्द्राणी वर्मा, राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
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