मंत्रजाप से जीवनदान
Next Article बाल संस्कार केन्द्र' ने बदली घर की तस्वीर
Previous Article सफलता की सीढ़ी

मंत्रजाप से जीवनदान

बाल संस्कार में बच्चों को जप की महिमा बताएं और उन्हें माला करने के लिए प्रेरित करें।

मेरे मित्र संत हैं लालजी महाराज। पहले वे अमदावाद से 55-60 किलोमीटर दूर वरसोड़ा गाँव मे रहते थे। वे किसान थे। उनकी माँ भगवन्नाम-जप कर रही थी। शाम का समय था। माँ ने बेटे से कहाः

"जरा गाय-भैंस को चारा डाल देना।"

बारिश के दिन थे। वे चारा उठाकर ला रहे थे तो उसके अंदर बैठे भयंकर साँप पर दबाव पड़ा और उसने काट लिया। वे चिल्लाकर गिर पड़े। साँप के जहर ने उन्हें भगवान की गोद में सुला दिया।

गाँव के लोग दौड़े आये और उनकी माँ से बोलेः "माई ! तेरा इकलौता बेटा चला गया।"

माँ- "अरे, क्या चला गया ? भगवान की जो मर्जी होती है वही होता है।"

माई ने बेटे को लिटा दिया, घी का दिया जलाया और माला घुमाना शुरु कर दिया। वह रातभर जप करती रही। सुबह बेटे के शरीर पर पानी छिड़ककर बोलीः "लालू ! उठ | सुबह हो गयी है।"

बेटे का सूक्ष्म शरीर वापस आया और बेटा उठकर बैठ गया। वे (लालजी महाराज) अभी भी हैं। 80 वर्ष से ऊपर उनकी उम्र है।

✍🏻सीख : मृतक में भी प्राण फूँक सकता है उत्तम जापक द्वारा श्रद्धा से किया गया मंत्रजाप !

 ✒लालजी महाराज मरणो उपरांत पुनः कैसे जीवित हो गए ?
Next Article बाल संस्कार केन्द्र' ने बदली घर की तस्वीर
Previous Article सफलता की सीढ़ी
Print
812 Rate this article:
5.0
Please login or register to post comments.
RSS
1345678910Last