प्रह्लाद हो जीवन का आदर्श
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प्रह्लाद हो जीवन का आदर्श

जिसने पूरे जगत को आनंदित-आह्लादित करनेवाला ज्ञान और प्रेम अपने हृदय में सँजोया है,उसे ‘प्रह्लाद कहते हैं । जिसकी आँखों से  परमात्म-प्रेम छलके,जिसकी वाणी से परमात्म-माधुर्य छलके,जिसके जीवन से परमात्म-रस छलके उसीका नाम है ‘प्रह्लाद । 


मैं चाहता हूँ कि आपके जीवन में भी प्रह्लाद आये । देवताओं की सभा में प्रश्न उठा :‘‘सदा नित्य नवीन रस में कौन रहता है ? कौन ऐसा है जो सुख-दुःख को सपना और भगवान को अपना समझता है ? 
‘सब वासुदेव की लीला है - ऐसा समझकर तृप्त रहता है,ऐसा कौन पुण्यात्मा है धरती पर ?

बोले : ‘‘प्रह्लाद ! ‘‘प्रह्लाद को ऐसा ऊँचा दर्जा किसने दिया ?

‘‘सत्संग ने । 
सत्संग द्वारा बुद्धि विवेक पाती है और गुरुज्ञानरूपी रंग से रंगकर सत्य में प्रतिष्ठित हो जाती है ।
आप भी प्रह्लाद की तरह पहुँच जाइये किन्हीं ऐसे संत-महापुरुष की शरण में जिन्होंने अपनी चुनरी को परमात्म-ज्ञानरूपी रंग से रंगा है और रंग जाइये उनके रंग में ।
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