कैसे हुआ गुड़ी पाड़वा का प्रारंभ
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कैसे हुआ गुड़ी पाड़वा का प्रारंभ

इस दिन मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामचंद्रजी ने बालि के अत्याचार से लोगों को मुक्त किया था । उसकी खुशी में लोगों ने घर-घर गुड़ी (ध्वजा) खड़ी कर उत्सव मनाया इसलिए यह दिन ‘गुड़ी पाड़वा' नाम से प्रचलित हुआ ।

ब्रह्माजी ने जब सृष्टि का आरम्भ किया उस समय इस तिथि को ‘प्रवरा (सर्वोत्तम) तिथि सूचित किया था ।इसमें व्यावहारिक,धार्मिक,सामाजिक,राजनीतिक आदि अधिक महत्त्व के अनेक कार्य आरम्भ किये जाते हैं ।

नये साल के प्रथम दिन से ही चैत्री नवरात्र का उपवास चालू हो जाता है । 9 दिन का उपवास करके माँ शक्ति की उपासना की जाती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक प्रसन्नता व शारीरिक स्वास्थ्य- लाभ भी सहज में ही मिल जाता है ।
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