विविध रोगों में आभूषण-चिकित्सा
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विविध रोगों में आभूषण-चिकित्सा

1. कर्ण-आभूषण धारण करने से आंत्र एवं गर्भाशय संबंधित विकारों  से छुटकारा मिलता है। कान में बाली पहनने से याददाश्त अच्छी होती है, मूत्र संबंधी विकार दूर होते हैं।

2. नथ, लौंग जैसे छोटे गहने भी मस्तिष्क को क्रियाशील रखने में सहायक होते नथ या लौंग मिर्गी जैसे रोग से हमारी रक्षा करती है। नाक-कान की तंत्रिकाओं का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है।

3. कंगन या चूड़ियां पहनने से वाणी रोग, हकलाहट और तोतलापन तो दूर होता ही है, साथ में उल्टी, जी मिचलाना जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है

4. पायल, पांव का तोड़ा भी कम उपयोगी नहीं है। इनसे पोलियो, लकवा, साइटिका और उदर रोगों से बचाव होता है। जानकारों का दावा है कि ये जननेंद्रियों और पीठ पर भी अपना अनुकूल प्रभाव डालती है।

5. बिछिया शरीर में होने वाली कई बीमारियों को कंट्रोल करती है। यह नर्वस सिस्टम ठीक रखने के साथ-साथ प्रजनन प्रणाली भी सामान्य बनाए रखती है।

विशेष सूचना:- स्वर्ण के आभूषण नाभि के ऊपर के अंगों में और चांदी के नाभि से नीचे के अंगों में ही पहनने चाहिए।
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