ज्ञान की वृद्धि में सहायक आठ बातें
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ज्ञान की वृद्धि में सहायक आठ बातें

विद्या-अध्ययन के समय आठ बातें ज्ञान की वृद्धि में सहायक हैं। 

पहली बात है - शांत रहना। 
इसके लिए ओऽऽ...म्ऽs... का १०-१५ मिनट प्लुत गुंजन करने का अभ्यास करो । शांत रहने से तुम्हारे में मनन शक्ति, चिंतन शक्ति विकसित होगी।

दूसरी बात है - इन्द्रियों का संयम। जो देखा, बस लपक पड़े, जो आया खा लिया,  खड़े-खड़े खा लिया - पानी पी लिया, खड़े-खड़े पेशाब कर लिया... यह जरा-जरा-सी गलती पशुत्व, आसुरीपना ले आती है। इससे मति-गति तामसी हो जाती है।

तीसरी बात - बच्चें दुःखदायी दोषों से बचे रहें ।
 दुःखदायी दोष है - गंदी फिल्म देखना, गंदी सोबत (संग) में आना, गंदे कर्म करना।

चौथी बात है - सदाचार करे।

पाँचवीं बात - ब्रह्मचर्य का पालन करे। 
(आश्रम की दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक पढ़ने से सफल होंगे।)

छठी बात - आसक्ति न रखे।

सातवीं बात - सत्य बोले ।

आठवीं बात है - सहनशक्ति बढ़ावे। 
माँ ने कुछ कह दिया तो कोई बात नहीं, माँ है न ! पिता ने या शिक्षक ने कुछ कह दिया तो रूठना नहीं चाहिए, मुँह सुजाना नहीं चाहिए ।

प्रश्नोत्तरी : किन दुःखदायी दोषों से बचना चाहिए ?
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