... तो आपके लिए सब सहज हो जायेगा
Next Article चिदानंदमय देह तुम्हारी .....
Previous Article The Strange Well

... तो आपके लिए सब सहज हो जायेगा

श्री रामकृष्ण परमहंस से एक शिष्य (मथुर बाबु) ने पूछा : “अगर चैतन्य में हमारी स्थिति हो जाय तो क्या हमारे लिए प्रकृति के नियम बदल सकते है ? ”
बोले  “क्यों नहीं ! हाँ, बदल सकते हैं, जो भी चाहे |”
शिष्य : “तो फिर क्या इस लाल गुडहल के पौधे में लाल फुल की जगह पर सफेद फुल भी लाया जा सकता है ? “
रामकृष्ण मुस्कराये |
एक दिन रामकृष्णजी ने देख कि लाल गुडहल के पौधे पर लाल फुल के साथ एक सफेद फुल लगा हुआ है | उन्होंने पुरी डाली तोड़ ली और ले जाकर शिष्य मथुर बाबु को दिखायी |
शिष्य ने आश्चर्यचकित होकर पूछा : “गुरूजी ! यह क्या है ?”
गुरूजी मंद-मंद मुस्कराये और बोले : “ये चमत्कार दिखाने के लिए नहीं होते लेकिन चैतन्य की सत्ता समझाने के लिए कभी-कभी साधकों के सामने हो जाते है |”
कैसा है ज्ञानियों की इच्छाशक्ति का प्रभाव ! जिनके आगे प्रकृति भी अपने नियम बदल देती है |
एक बार एक डॉक्टर मेरे (पूज्य बापूजी के ) पीछे लगा | उसकी अपनी दवाई बनाने की मशीनरी थी | बोले : “गुरूजी एक बार चेक कर लें, हड्डियों का कैल्शियम जाँचने की मशीन लाया हूँ |”
मैंने उसकी प्रार्थना मान के रख दिया पैर उसकी मशीन पर | वह मेरे सामने देखता रह गया | बोला : “इतना प्रचुर कैल्शियम ! २५ साल के जवान का जो कैल्शियम होना चाहिए वही है |”
मैंने कहा : “अब क्या चेक करना है ?”
वह और भी साधन लाया था |
“बी.पी. चेक करना है ?”
बोला : “हाँ |”
“कैसा बी.पी. चाहिए?”
बोले  “नॉर्मल|”
“लो नॉर्मल |  अब कैसा चाहिए? हाई चाहिए ?”
“ओह ! २४० ! इतना हाई !”
“अब देख, लो बी.पी. |”
तो देखा लो बी.पी. – ९० ! उसने कहा : “आप भगवान है |” अरे ! सभी भगवान है | नहीं जानते तो छिपे हुये भगवान है, जानते है तो जागृत भगवान है और क्या ?
आप एक बार उस परब्रम्ह परमात्मा में स्थित हो जाओ तो आपके लिए सब सहज हो जायेगा | मुझे जो गाय दूध पिलाती थी वह गर्भवती हो गयी थी | अब दूध कहाँ से लाना ? तो मैंने प्यार से गाय की गर्दन को सहलाया, वाह फोटो भी है | मैंने कहा : “अब दूध पिलाना बंद कर दिया क्या ?” फिर उस गाय ने जीवन में दूध कभी बंद नहीं किया, जब तक वह जी | ऐसे ही आम का वृक्ष बारहों महीने फल देता है मेरे को | आँवले का वृक्ष बारहों महीने फल देता है और भगवान तो बारहों महीने, चौबीसों घंटे, हर सेकंड फलित – ही – फलित कर रहे है !
- स्त्रोत ऋषिप्रसाद – मई २०१३ से

Next Article चिदानंदमय देह तुम्हारी .....
Previous Article The Strange Well
Print
5504 Rate this article:
No rating
Please login or register to post comments.
RSS
First567810121314Last