बीरबल की बुद्धिमत्ता
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बीरबल की बुद्धिमत्ता

Birbal's Wisdom

बालक बीरबल बहुत ही बुद्धिमान,हिम्मतवाला और तेजस्वी था । जानते हो क्यों ? क्योंकि बचपन से ही वह सत्संग में जाता था,गुरु से प्राप्त सारस्वत्य मंत्र का जप करता था,ध्यान करता था । 

इससे उसमें इतनी शक्ति आ गई कि १५ वर्ष की उम्र में ही अकबर का खास मंत्री बन गया था ।

बीरबल की बुद्धि इतनी कुशाग्र थी कि अकबर उसको अपने राज-काज के
कार्यों में तो साथ रखता ही था,साथ ही अपनी निजी समस्याओं में भी उससे मदद लेता था । कई बार अकबर की गलती को बीरबल अपनी बुद्धिमत्ता से
समझाकर दूर कर देता था।

एक बार किसी ब्राह्मण पर अकबर बहुत बिगड़ा और उसे फाँसी की सजा सुना दी। ब्राह्मण बीरबल के पास आया । बीरबल उस ब्राह्मण को लेकर अकबर के पास गया ।
ब्राह्मण को देखकर अकबर बिगड़ा कि "बीरबल ! इसकी सिफारिश तुम करोगे तो मैं तुमको भी सजा दे दूँगा और तुम जो बोलोगे न,मैं उल्टा करूँगा ।"

बीरबल :" जहाँपनाह ! आप वचन के पक्के हैं यह मुझे पता है । आप इसको फाँसी दे दीजिये ।"
"जाओ,'उल्टा करूंगा' बोल दिया है,इसलिए छोड़ना पड़ता है । बीरबल !इतनी कुशाग्र बुद्धि कहाँ से लाये ?"
बीरबल :"सारस्वत्य मंत्र का जप और उससे मिले बल का सदुपयोग कर के ।"

"सारस्वत्य मंत्र का प्रत्यक्ष प्रभाव वर्तमान में भी देखा जा सकता है । ब्रह्मनिष्ठ पूज्य बापूजी से सारस्वत्य मंत्र प्राप्त कर नियमित जप करनेवाले विद्यार्थी आज भी अपने क्षेत्र में सफलता की ऊँचाईयों को छू रहे हैं ।"

संकल्प :- हम भी नियमित सारस्वत्य मंत्र का जप करेंगे ।

📚ऋषि-प्रसाद/अक्टूबर २००६
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