भ्रामरी प्राणायाम
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भ्रामरी प्राणायाम

विधिः सर्वप्रथम दोनों हाथों की उँगलियों को कन्धों के पास ऊँचा ले जायें। दोनों हाथों की उँगलियाँ कान के पास रखें। गहरा श्वास लेकर तर्जनी उँगली से दोनों कानों को इस प्रकार बंद करें कि बाहर का कुछ सुनाई न दे। अब होंठ बंद करके भँवरे जैसा गुंजन करें। श्वास खाली होने पर उँगलियाँ बाहर निकालें।

लाभः वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि भ्रामरी प्राणायाम करते समय भँवरे की तरह गुंजन करने से छोटे मस्तिष्क में स्पंदन पैदा होते हैं। इससे एसीटाईलकोलीन, डोपामीन और प्रोटीन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया को उत्तेजना मिलती है। इससे स्मृतिशक्ति का विकास होता है। यह प्राणायाम करने से मस्तिष्क के रोग निर्मूल होते हैं। अतः हर रोज़ सुबह 8-10 प्राणायाम करने चाहिए।

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