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ज्ञान मुद्रा

प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछा कर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में बैठें। पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। उसके बाद शांतचित्त होकर मुद्राओं को दोनों हाथों से करें। विशेष परिस्थिति में इन्हें कभी भी कर सकते हैं।

 

ञान मुद्राः

तर्जनी अर्थात प्रथम उँगली को अँगूठे के

नुकीले भाग से स्पर्श करायें। शेष तीनों उँगलियाँ

सीधी रहें।

लाभः मानसिक रोग जैसे कि अनिद्रा अथवा अति निद्रा, कमजोर यादशक्ति, क्रोधी स्वभाव आदि हो तो यह मुद्रा अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगी। यह मुद्रा करने से पूजा पाठ, ध्यान-भजन में मन लगता है। इस मुद्रा का प्रतिदिन 30 मिनठ तक अभ्यास करना चाहिए।

 
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