तुम्हारे जीवन में चार चाँद
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तुम्हारे जीवन में चार चाँद

लम्बा श्वास लो । उसमें ‘ॐ’ का भाव भरो, ‘मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं । मैं किसीसे राग-द्वेष न करूँ, किसीका बुरा न सोचूँ और बुरा न करूँ ।’ आज से मैं संकल्प करता हूँ, ‘मैं प्रभु का हूँ । प्रभु के नाते सबका मंगल, ॐ शांति...’- यह मन में विचार करो । श्वास भीतर रोककर होंठ बंद रखें और कंठ से ॐकार का जप करते हुए गर्दन को ऊपर-नीचे करें - ऐसा रोज दो बार करें । इससे कंठ तो साफ-सुथरा व पवित्र होगा, हृदय भी पवित्र होगा । जो ध्यान-भजन, सेवा-पूजा करते हैं वह भी दस गुना प्रभावशाली बन जायेगा । समझते हो मोहन ?... इस प्रकार समझाकर बच्चों को प्रोत्साहित करें ।

ॐकार मंत्र जपने से पहले प्रतिज्ञा करनी होती है : ‘ॐकार मंत्रः, गायत्री छंदः, भगवान नारायण ऋषिः, अंतर्यामी परमात्मा देवता, अंतर्यामी प्रीत्यर्थे, परमात्मप्राप्ति अर्थे जपे विनियोगः ।’

कानों में उँगलियाँ डालकर लम्बा श्वास लो । जितना ज्यादा श्वास लोगे उतने फेफड़ों के बंद छिद्र खुलेंगे, रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी । फिर श्वास रोककर कंठ में भगवान के पवित्र, सर्वकल्याणकारी ॐकार का जप करो । मन में ‘प्रभु मेरे, मैं प्रभु का’ बोलो, फिर मुँह बंद रख के कंठ से ॐ... ॐ... ॐ... ओऽऽऽ म्... का उच्चारण करते हुए श्वास छोड़ो । जप से बहुत फायदा होता है । और ‘ॐ’ भगवान का नाम है । अंतर्यामी भी खुश होंगे । यह प्रयोग दस बार करवाओ । फिर कानों में से उँगलियाँ निकलवा दीं । इतना करने के बाद शांत बैठ गये । होंठों से जपो - ‘ॐ ॐ प्रभुजी ॐ, आनंद देवा ॐ, अंतर्यामी ॐ... तुम दूर नहीं हो, दुर्लभ नहीं हो, परे नहीं हो, पराये नहीं हो’- दो मिनट करना है । फिर हृदय से जपो - ‘ॐ शांति... ॐ आनंद... ॐ ॐ ॐ...’

सुमिरन ऐसा कीजिये खरे निशाने चोट ।

मन ईश्वर में लीन हो हले न जिह्वा होठ ।।

जीभ मत हिलाओ, होंठ मत हिलाओ, हृदय से ‘ॐ आनंद, ॐ शांति... ॐ ॐ ॐ...’, अब कंठ से जप करना है । श्रीकृष्ण ने यह चस्का यशोदाजी को लगाया था । दो मिनट करो, ‘ॐ ॐ ॐ... मैं प्रभु का, प्रभु मेरे...’ आनंद आयेगा, रस आयेगा । शुरू में भले आपको थोड़ा कम आनंद आये लेकिन फिर बढ़ता जायेगा, सूझबूझ, स्वभाव सँवर जायेगा । और इसका चस्का जिनको भी लगेगा उनके सम्पर्क में आनेवाले स्वाभाविक ही भारतीय संस्कृति के भक्त बन जायेंगे । इसको केवल व्यापक करना है, और क्या है ! हम भी करेंगे और आप भी करो तथा अपने पड़ोस में कराओ । जब ॐकार मंत्र के जप का प्रयोग करायें तब गौचंदन या गूगल धूप कर सकें तो ठीक है, नहीं तो ऐसे ही करायें । विद्युत का कुचालक कम्बल, कारपेट आदि का आसन हो ।

तुम लोग बच्चों से यह प्रयोग करवाओ, फिर बच्चों के जीवन में चार चाँद न लगें तो मेरी जिम्मेदारी ! शुरू-शुरू में चस्का डालो, फिर बच्चे खुद ही चालू कर देंगे । अपने बेटे-बेटियों को, पड़ोस के बेटे-बेटियों को यह प्रयोग जरूर सिखाओ तो उनके जीवन में नित्य उत्सव, नित्य श्री और नित्य मंगल होने लगेगा । बच्चे खुश रहेंगे, माँ-बाप की बात को टालकर बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बनाने की गंदी आदत से बच जायेंगे, नेक बनेंगे और माँ-बाप का भी मंगल होगा ।

(टिप्पणी : इस प्रयोग को आश्रम की विडियो मैगजीन ‘ॠषि दर्शन’, नवम्बर 2012 में देख सकते हैं)
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