Health and Yoga_2
Health and Yoga_2
Health and Yoga_1
Health and Yoga_1
योगमुद्रासन
Next Article मयूरासन
Previous Article कटिपिण्डमर्दनासन

योगमुद्रासन

योगाभ्यास में यह मुद्रा अति महत्त्वपूर्ण है इससे इसका नाम योगमुद्रासन रखा गया है ध्यान मणिपुर चक्र में श्वास रेचक, कुम्भक और पूरक

विधि : पद्मासन लगाकर दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जायें बायें हाथ से दाहिने हाथ की कलाई पकडें दोनों हाथों को खींचकर कमर तथा रीढ के मिलन स्थान पर ले जायें अब रेचक करके कुम्भक करें श्वास को रोककर शरीर को आगे झुकाकर भूमि पर टेक दें फिर धीरे धीरे सिर को उठाकर शरीर को पुनः सीधा कर दें और पूरक करें। प्रारंभ में यह आसन कठिन लगे तो सुखासन या सिद्धासन में बैठकर करें पूर्ण लाभ तो पद्मासन में बैठकर करने से ही होता है

पाचनतन्त्र  के अंगों की स्थानभ्रष्टता ठीक करने के लिए यदि यह आसन करते हों तो केवल पाँच-दस सेकण्ड तक ही करें, एक बैठक में तीन से पाँच बार सामान्यतया यह आसन तीन मिनट तक करना चाहिए आध्यात्मिक उद्देश्य से योगमुद्रासन करते हों तो समय की अवधि रुचि और शक्ति के अनुसार बढायें लाभ : योगमुद्रासन भली प्रकार सिद्ध होता है तब कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है पेट के गैस की बीमारी दूर होती है पेट एवं आँतों की सब शिकायतें दूर होती हैं कलेजा, फेफडे, आदि यथा स्थान रहते हैं हृदय मजबूत बनता है रक्त के विकार दूर होते हैं कुष्ठ और यौनविकार नष्ट होते हैं पेट बडा हो तो अन्दर दब जाता है। शरीर मजबूत बनता है मानसिक शक्ति बढती है योगमुद्रासन से उदरपटल सशक्त बनता है पेट के अंगों को अपने स्थान में टिके रहने में सहायता मिलती है नाडीतन्त्र और खास करके कमर के नाडी-मण्डल को बल मिलता है

इस आसन में सामान्यतया जहाँ एिडयाँ लगती हैं वहाँ कब्ज के अंग होते हैं उन पर दबाव पडने से आँतों में उत्तेजना आती है पुराना कब्ज दूर होता है अंगों  की स्थानभ्रष्टता के कारण होनेवाला कब्ज भी, अंग अपने स्थान में पुनः यथावत् स्थित हो जाने से नष्ट हो जाता है धातु की दुर्बलता में योगमुद्रासन खूब लाभदायक है


Next Article मयूरासन
Previous Article कटिपिण्डमर्दनासन
Print
6738 Rate this article:
3.8

Please login or register to post comments.

Name:
Email:
Subject:
Message:
x