पूज्य बापूजी की तीव्र ईश्वर-प्राप्ति की तडप लालजी महाराज के शब्दों में...

पूज्य बापूजी की तीव्र ईश्वर-प्राप्ति की तडप लालजी महाराज के शब्दों में...

अहमदाबाद से आसुमलजी की माताजी माँ महँगीबा मोटी कोरल आयीं । मेरे पास आकर वे रोते हुए बोलीं : ‘‘मेरा आसु आपके पास है । मुझे उससे मुलाकात करा दीजिये, मैं तभी जल पीऊँगी ।‘‘ मेरा हृदय पिघल गया और मैं उनको दत्त-कुटीर में ले गया । वहाँ श्री आसुमलजी को देखकर पहले तो उनकी मातुश्री बहुत ही रोने लगीं। मुझे समझने में देर नहीं लगी कि श्री आसुमलजी का तो विवाह हो गया है । मैं (लालजी महाराज) चौंका कि पतिपरायणा नारीरत्न को छोड के गुड और चना खाकर श्री आसुमलजी ईश्वरप्राप्ति के लिए तडप रहे हैं ! जमीन पर टाट बिछाकर शयन कर रहे हैं ! धन्य है आपका त्याग, आपका वैराग्य ! आपको ईश्वरप्राप्ति नहीं होगी तो किसको होगी !
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