संत वाणी

संत वाणी

प्रतिदिन प्रातः अपने आत्म-साक्षात्कार के संकल्प को दुहराना चाहिए । सूक्ष्म आत्म-निरीक्षण करना चाहिए कि जीवन में दुःख, अशांति और समस्याओं का क्या कारण है ? सुबह नींद से उठो तो तुरन्त जगत की तरफ मत दौडो । दो मिनट शांत हो जाओ : ‘मैं शांत आत्मा हूँ, चैतन्य आत्मा हूँ । वे सुंदर दिन कब आयेंगे जब मैं अपने आप में पूर्णरूप से स्थित होऊँगा ? ॐ... ॐ... मैं निरोग हूँ । रोग मुझे नहीं लग सकता । रोग शरीर को आयेगा और जायेगा लेकिन मुझे कोई रोग छू नहीं सकता । मृत्यु मेरी कभी हो नहीं सकती क्योंकि मैं अमर आत्मा हूँ । चैतन्य हूँ । शांत हूँ । शुद्ध हूँ...‘
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