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कैसे करें नूतन वर्ष का स्वागत
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कैसे करें नूतन वर्ष का स्वागत

दीपावली के दूसरे दिन को वर्ष का प्रथम दिन मानते हैं । इस दिन जो मनुष्य हर्ष में रहता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष में जाता है और जो शोक में रहता है, उसका पूरा वर्ष शोक में व्यतीत होता है ।
दीपावली और नूतन वर्ष के दिन संत-महापुरुषों व मंगलमय चीजों का दर्शन करना शुभ माना गया है, पुण्य-प्रदायक माना गया है । जैसे - सूर्यदेव, देव-प्रतिमा, गौ, अग्नि, गुरु, हंस, मोर, नीलकंठ, बछड़े सहित गाय, पीपल वृक्ष, दीपक, सुवर्ण, तुलसी, घी, दही, शहद, पानी से भरा घड़ा, कपूर, चाँदी, कुश, गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूलि, गौशाला, दूर्वा, चावल और अक्षत आदि का दर्शन "ब्रह्मवैवर्त पुराण" में शुभ माना गया है ।
(ब्र.पु. श्रीकृष्णजन्म खंड, अध्याय : ७६)
नूतन वर्ष के दिन सुबह जगते ही बिस्तर पर बैठे-बैठे चिंतन करना कि ‘आनंदस्वरूप परमात्मा मेरा आत्मा है । प्रभु मेरे सुहृद हैं, सखा हैं, परम हितैषी हैं, ॐ ॐ आनंद ॐ... ॐ ॐ माधुर्य ॐ...। वर्ष शुरू हुआ और देखते-देखते आयुष्य का एक साल बीत जायेगा फिर दीपावली आयेगी । आयुष्य क्षीण हो रहा है । आयुष्य क्षीण हो जाय उसके पहले मेरा अज्ञान क्षीण हो जाय । हे ज्ञानदाता प्रभु ! मेरा दुःख नष्ट हो जाय, मेरी चिंताएँ चूर हो जायें । हे चैतन्यस्वरूप प्रभु ! संसार की आसक्ति से दुःख, चिंता और अज्ञान बढ़ता है और तेरी प्रीति से सुख, शांति और माधुर्य का निखार होता है । प्रभु ! तुम कैसे हो तुम्हीं जानो, हम जैसे-तैसे हैं तुम्हारे हैं देव ! ॐ ॐ ॐ...
फिर बिस्तर पर तनिक शांत बैठे रहकर अपनी दोनों हथेलियों को देखना -
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । 
करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम् ।।
अपने मुँह पर हाथ घुमा लेना । फिर दायाँ नथुना चलता हो तो दायाँ पैर और बायाँ चलता हो तो बायाँ पैर धरती पर पहले रखना ।
इस दिन विचारना कि "जिन विचारों और कर्मों को करने से हम मनुष्यता की महानता से नीचे आते हैं उनमें कितना समय बरबाद हुआ ? अब नहीं करेंगे अथवा कम समय देंगे और जिनसे मनुष्य-जीवन का फायदा होता है - सत्संग है, भगवन्नाम सुमिरन है, सुख और दुःख में समता है, साक्षीभाव है... इनमें हम ज्यादा समय देंगे, आत्मज्योति में जियेंगे । रोज सुबह नींद में से उठकर ५ मिनट शिवनेत्र पर ॐकार या ज्योति अथवा भगवान की भावना करेंगे...।"  
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