1. Saaf Safai

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  2. Naye vastu lana

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  3. Deep Jalana

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  4. Mithai Khana

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भाईदूज
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भाईदूज

दीपावली के बाद आता है भाईदूज का पर्व । दीपावली के पर्व का पाँचवाँ दिन । भाईदूज भाइयों की बहनों के लिए और बहनों की भाइयों के लिए सद्भावना बढ़ाने का दिन है ।

इस दिन बहन भाई को इस भावना से तिलक करती है कि मेरा भाई त्रिलोचन रहे । (उसका सद्विवेकरूपी तीसरा नेत्र जागृत हो ।)
इस दिन भाई अपनी बहन के यहाँ भोजन करे और बहन उसके ललाट पर तिलक करे तो वह त्रिलोचन, बुद्धिमान होता है और यमपाश में नहीं बँधता । यह भाईदूज हमारे मन को भी उन्नत रखती है और परस्पर संकल्प देकर सुरक्षित भी करती है ।  

हमारा मन एक कल्पवृक्ष है । मन जहाँ से फुरता है, वह चिद्घन चैतन्य सच्चिदानंद परमात्मा सत्यस्वरूप है । हमारे मन के संकल्प आज नहीं तो कल सत्य होंगे ही । किसीकी बहन को देखकर यदि मन में दुर्भाव आया हो तो भाईदूज के दिन उस बहन को अपनी ही बहन माने और बहन भी " पति के सिवाय सब पुरुष मेरे भाई हैं "  यह भावना विकसित करे और " भाई का कल्याण हो " - ऐसा संकल्प करे । भाई भी बहन की उन्नति का संकल्प करे । इस प्रकार भाई-बहन के परस्पर प्रेम और उन्नति की भावना को बढ़ाने का अवसर देनेवाला पर्व है  " भाईदूज " ।

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