1. Saaf Safai

    Saaf Safai
  2. Naye vastu lana

    Naye vastu lana
  3. Deep Jalana

    Deep Jalana
  4. Mithai Khana

    Mithai Khana
दीपावली-संदेश
Next Article Diwali Anushthan Shivir - 2018

दीपावली-संदेश

दीपावली के दिन आप अपने घर तो दीया जलाओ लेकिन आस-पड़ोसवाले गरीब का भी ध्यान रखो, वहाँ भी ४ दीये जलाकर आओ । बच्चों को कपड़े बाँटकर आओ, मिठाई दे आओ । छोटे-से-छोटे व्यक्ति को स्नेह से मिलो और अपना बड़प्पन भूलो । जैसे आम के वृक्ष में फल लगते हैं तो झुकता है और बबूल का वृक्ष फलित होता है तो भी काँटों से लदा रहता है, ऐसे ही जिसके जीवन में धर्म है, संस्कार हैं, उसके जीवन में नम्रता, सरलता, सहनशक्ति, उदारता आदि सद्गुण आते हैं और जो अधर्म एवं कुसंस्कारों के आश्रित है, अहं की अकड़ से दूसरों को परेशान करता है व खुद भी होता है उसका जीवन दुर्गुणरूपी काँटों से लद जाता है ।

मनुष्य-जीवन की माँग है कि उसे खुशी चाहिए, पुष्टि चाहिए, प्रकाश चाहिए, सहानुभूति एवं  स्नेह  चाहिए ।  दीपावली  स्नेह  का  निमित्त उत्पन्न करती है, प्रकाश और पुष्टि का निमित्त उत्पन्न करती है । 

जैसे अमावस्या के अंधकार में दीप जलाये जाते हैं, वैसे ही मनुष्य का प्रारब्ध चाहे कैसा भी हो, गुरुज्ञानरूपी प्रकाश और अपने पुरुषार्थ के द्वारा वह अपने अंधकारमय जीवन को प्रकाशमय कर सकता है ।

असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतंगमय ।

हम असत्य से सत्य की ओर चलें । अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का पुरुषार्थ करें । मृत्यु से अमरता की ओर चलें । जन्मने-मरनेवाली देह को सत्य मानने की भूल निकाल दें । असत्य से ऊपर उठकर अपने सत्य, साक्षी स्वरूप में आयें ।  मरने  के  बाद  भी  जो  रहता  है  उस अमृतस्वरूप में आयें । 


Next Article Diwali Anushthan Shivir - 2018
Print
11508 Rate this article:
3.9

Name:
Email:
Subject:
Message:
x
12