भूलकर भी ना करे...

श्री गणेश स्तुति

गणेश उपासना

गणपति जी का स्वरुप देता अनोखी प्रेरणा
Previous Article भगवान गणपतिजी प्रथम पूज्य कैसे बने

गणपति जी का स्वरुप देता अनोखी प्रेरणा

जो इन्द्रिय-गणों का, मन-बुद्धि गणों का स्वामी है, उस अंतर्यामी विभु का ही वाचक है ‘गणेश’ शब्द ।
‘गणानां पतिः इति गणपतिः ।’ उस निराकार परब्रह्म को समझाने के लिए ऋषियों ने और भगवान ने क्या लीला की है !
कथा आती है, शिवजी कहीं गये थे ।
पार्वतीजी ने अपने योगबल से एक बालक पैदा कर उसे चौकीदारी करने रखा । शिवजी जब प्रवेश कर रहे थे तो वह बालक रास्ता रोककर खड़ा हो गया और शिवजी से कहा : ‘‘आप अंदर नहीं जा सकते ।“
शिवजी ने त्रिशूल से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया । पार्वतीजी ने सारी घटना बतायी । शिवजी बोले : ‘अच्छा-अच्छा, यह तुम्हारा मानसपुत्र है । चलो, तुम्हारा मानसपुत्र है तो हम भी इसमें अपने मानसिक बल की लीला दिखा देते हैं ।“

शिवजी ने अपने गण को कहा : ‘‘जाओ, जो भी प्राणी मिले उसका ,सिर ले आओ ।“ गण हाथी का सिर ले आये और शिवजी ने उसे बालक के धड़ पर लगा दिया । सर्जरी की कितनी ऊँची घटना है ! बोले, ‘मेरी नाक सर्जरी से बदल दी, मेरा फलाना बदल दिया...’ अरे, सिर बदल दिया तुम्हारे भोले बाबा ने ! कैसी सर्जरी है और फिर इस सर्जरी से लोगों को कितना समझने को मिला !
समाज को अनोखी प्रेरणा मिली:
गणेशजी के कान बड़े सूपे जैसे हैं । वे यह प्रेरणा देते हैं कि जो कुटुम्ब का बड़ा हो, समाज का बड़ा हो उसमें बड़ी खबरदादरी होनी चाहिए । सूपे में अन्न-धान में से कंकड़-पत्थर निकल जाते हैं । असार निकल जाता है, सार रह जाता है । ऐसे ही सुनो लेकिन सार-सार ले लो । जो सुनो वह सब सच्चा न मानो, सब झूठा न मानो, सारसार लो । यह गणेशजी के बाह्य विग्रह से प्रेरणा मिलती है ।

गणेशजी की सूँड लम्बी है अर्थात् वे दूर की वस्तु की भी गंध ले लेते हैं । ऐसे ही कुटुम्ब का जो अगुआ है, उसको कौन, कहाँ, क्या कर रहा है या क्या होनेवाला है इसकी गंध आनी चाहिए ।

हाथी के शरीर की अपेक्षा उसकी आँखें बहुत छोटी हैं लेकिन सूई को भी उठा लेता है हाथी । ऐसे ही समाज का, कुटुम्ब का अगुआ सूक्ष्म दृष्टिवाला होना चाहिए । किसको अभी कहने से क्या होगा ? थोड़ी देर के बाद कहने से क्या होगा ? तोल-मोल के बोले, तोल-मोल के निर्णय करे ।

भगवान गणेशजी की सवारी क्या है ? चूहा ! इतने बड़े गणपति चूहे पर कैसे जाते होंगे ? यह प्रतीक है समझाने के लिए कि छोटे-से-छोटे आदमी को भी अपने सेवा में रखो । बड़ा आदमी तो खबर आदि नहीं लायेगा लेकिन चूहा किसीके भी घर में घुस जायेगा । ऐसे छोटे-से-छोटे आदमी से भी कोई-न-कोई सेवा लेकर आप दूर तक की जानकारी रखो और अपना संदेश, अपना सिद्धांत दूर तक पहुँचाओ । ऐसा नहीं की चूहे पर गणपति बैठते हैं और घर-घर जाते हैं । यह संकेत है आध्यात्मिक ज्ञान के जगत में प्रवेश पाने का ।
Previous Article भगवान गणपतिजी प्रथम पूज्य कैसे बने
Print
1082 Rate this article:
No rating

Please login or register to post comments.

Name:
Email:
Subject:
Message:
x

RSS