गुरुपूर्णिमा महत्सव :२७ जुलाई
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गुरुपूर्णिमा महत्सव :२७ जुलाई

'हे गुरुपूर्णिमा ! हे व्यासपूर्णिमा ! तू कृपा करना.... गुरुदेव के साथ मेरी श्रद्धा की डोर कभी टूटने न पाये.... मैं प्रार्थना करता हूँ गुरुवर ! आपके श्रीचरणों में मेरी श्रद्धा बनी रहे, जब तक है जिन्दगी..... 

 वह भक्त ही क्या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे ? 

 भूल प्रभु को जिंदा रहूँ कभी ये खुदा न करे । 

 हे गुरुवर ! 

 लगाया जो रंग भक्ति का, उसे छूटने न देना । 

 गुरु तेरी याद का दामन, कभी छूटने न देना ॥ 

 हर साँस में तुम और तुम्हारा नाम रहे । 

 प्रीति की यह डोरी, कभी टूटने न देना ॥ 

 श्रद्धा की यह डोरी, कभी टूटने न देना । 

 बढ़ते रहे कदम सदा तेरे ही इशारे पर ॥ 

 गुरुदेव ! तेरी कृपा का सहारा छूटने न देना। 

 सच्चे बनें और तरक्की करें हम, 

 नसीबा हमारी अब रूठने न देना। 

 देती है धोखा और भुलाती है दुनिया, 

 भक्ति को अब हमसे लुटने न देना ॥ 

 प्रेम का यह रंग हमें रहे सदा याद, 

 दूर होकर तुमसे यह कभी घटने न देना। 

 बडी़ मुश्किल से भरकर रखी है करुणा तुम्हारी.... 

 बडी़ मुश्किल से थामकर रखी है श्रद्धा-भक्ति तुम्हारी.... 

 कृपा का यह पात्र कभी फूटने न देना ॥ 

 लगाया जो रंग भक्ति का उसे छूटने न देना । 

 प्रभुप्रीति की यह डोर कभी छूटने न देना ॥ 

 आज गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर हे गुरुदेव ! आपके श्रीचरणों में अनंत कोटि प्रणाम.... आप जिस पद में विश्रांति पा रहे हैं, हम भी उसी पद में विशांति पाने के काबिल हो जायें.... अब आत्मा-परमात्मा से जुदाई की घड़ियाँ ज्यादा न रहें.... ईश्वर करे कि ईश्वर में हमारी प्रीति हो जाय.... प्रभु करे कि प्रभु के नाते गुरु-शिष्य का सम्बंध बना रहे...'
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