साधकों ने है बाँधी
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साधकों ने है बाँधी

साधकों ने है बाँधी प्रेम की डोरी सदगुरु आयेंगे ।
हम सबकी लगी है प्रीत की डोरी कि सदगुरु आयेंगे ।।
अपना बनाते दरपे बुलाते गिरते हुओं को उठाते हैं ।
मेरे सद्गुरु हैं इतने महान कि रखते हैं सबका ध्यान ।।
(१) गहरा पावन दुर्लभ सत्संग सबको सहज में सुनाते हैं गुरुवर ।
नाम की दौलत मोक्ष की कुंजि हम सबको दे देते हैं गुरुवर ।
सबसे निराले सबको सँभालें हम सबके रखवाले हैं । मेरे सदगुरु हैं..... ।। टेक ।।
(२) धन दौलत और मान-बडाई इनका मोह छुडाते हैं गुरुवर ।
भीतर का सुख आनंद शांति अंतर घट में दिलाते हैं गुरुवर ।
तन भी है तेरा मन भी है तेरा तु ही केवल हमारे हो । मेरे सदगुरु हैं..... ।। टेक ।।
(३) द्वार पे इनके जो भी आता खाली नहीं लौटाते हैं गुरुवर ।
झोली भरते दुःख भी हरतें दाता सभी के कहाते हैं गुरुवर ।
विघ्न विनाशी सब ओर वासी तु ही जग से न्यारे हो । मेरे सदगुरु हैं..... ।। टेक ।।
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