खीर खाता है कि डंडा
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खीर खाता है कि डंडा

एक लोभी सेठ था । खाने का लोभी...
पत्नी तो मर गई थी,रसोइये को बोला खीर बना दे ।
मैं घूमकर आता हूँ । 
रास्ते में कोई मिला,पूछा- "कहाँ जा रहे हो।"
"शादी में"
"चलो मैं भी आता हूँ ।"
चटोरा तो था,खाया इतना खाया कि खाने का माल गले तक भरा ।
अब खीर तो है महँगी...
केसर-वेसर डाला है । ये रसोइया खा जाएगा ।
उस लोभी चालाक ने नौकर को झुठलाया बोले तू भी सो जा रामू,मैं भी सो जाता हूँ,रात को जिसे बढ़िया सपना आएगा वो सुबह भर पेट खीर खायेगा ।

सुबह हुआ बोले -" ले आओ खीर,कीमती खीर "
"सेठजी पहले अपना स्वप्ना बताइये ।"
सेठ ने अपनी बंडलबाजी चालू किया "I was the Prime Minister of India. इससे बड़ा सपना तेरे को नहीं आ सकता ।"
लेकिन रामू मुस्कराना लगा।
सेठ ने देखा कि हो सकता है इसने बड़ा सपना देखा हो। बोला-"ठहर.. ठहर... ठहर... फिर इंद्र देवता को पता चला। मैं इन्द्र का guest हुआ । 
रामू मुस्कराया..
बोले -"रूकना... फिर ब्रह्मा,
विष्णु,शिवजी को भी पता चला। मैं उनका भी मुख्य अतिथि हुआ फिर मेरी आगता-स्वागता हुआ । इससे बड़ा सपना तो तेरे बाप को भी नहीं आ सकता। मेरी जीत हो गई,लाओ मेरी खीर ।"

रामू कहता है सेठजी मेरी भी तो सुनों -"मुझे रात को स्वप्ना आया। गुरूजी आएं हैं और बड़ी-बड़ी आँखे दिखा रहे हैं,हाथ में डंडा लिए हुए हैं,ऐसा गुरूजी को कभी नहीं देखा । गुरूजी नाराज दिखाई दिए तू मेरा चेला होकर सर्दी की रातों में भूखा मर रहा है। खीर वहाँ खराब हो रही है और नींद यहाँ खराब हो रही है। खीर खाता है कि डंडा खाता है..
मेरा चेला होकर भविष्य की कल्पना करता है,भूतकाल में गिरता है.. 
बापू का बच्चा,नहीं रहता कच्चा 
खीर खाता है कि डंडा..
मैं तो उठा ।"
"फिर क्या हुआ ???"
मैंने तो खीर खाई भरपेट ।
थोड़ी सी बची थी,कुतिया थी बेचारी बच्चों वाली,मैने उसको डाल दी । ये चमचम चमकता चाँदी का चम्मच लीजिए और तपेली साफ कर दी ।"
"पागल मुझे क्यों नहीं बुलाया ?"
"Security tight.. Prime Minister of India. अगर मैं वहाँ भी पहुँचता तो स्वर्ग में इधर-उधर गए । वो सब तुम्हें  मुबारक है। हमें तो वर्तमान में अपने-आप में खुश रहने दो ।
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