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तू गुलाब होकर महक ! तुझे जमाना जाने

तू गुलाब होकर महक ! तुझे जमाना जाने

एक बार गुरुदेव (पूज्यपाद भगवत्पाद साँई श्री श्री लीलाशाहजी महाराज) ने गुलाब का फूल दिखाकर जो मुझसे कहा था, वह आज भी मुझे ठीक से याद है।

वे बोले थेः "देख बेटा ! यह क्या है ?"
"साँईं ! यह गुलाब है।"
"यह लेकर किराने की दुकान में जा और इसे घी के डिब्बे के ऊपर रख, गुड़ के थैले पर रख, शक्कर के बोरे पर रख, तेल के डिब्बे पर रख, मूँगफली, मूँग, चावल, चने वगैरह सभी वस्तुओं के ऊपर रख, फिर इसे सूँघ तो सुगंध किसकी आयेगी ?"

मैंने कहाः "सुगंध तो गुलाब की ही आयेगी।"
गुरुदेव बोलेः "इसे गटर के आगे रख, फिर सूँघकर देख तो सुगंध किसकी आयेगी ?"
मैंने कहाः "गुलाब की ही।"

गुरुदेव बोलेः "बस, तू ऐसा ही बनना। दूसरे की दुर्गन्ध अपने में न आने देना वरन् अपनी सुगंध फैलाते रहना और आगे बढ़ते रहना।

तू गुलाब होकर महक ! तुझे जमाना जाने...
तू संसार में गुलाब की तरह ही रहना। किसी के संस्कार अथवा गुण-दोष अपने में कदापि न आऩे देना। अपनी साधना एवं सत्संग की सुवास चारों ओर फैलाते रहना।

तो बच्चे हों चाहे बड़े हों, मैं आपको ऐसा बोलता हूँ कि आप भी ऐसा बनना। दूसरे के कुसंग में आप नहीं आना। तू गुलाब होकर महक ! तुझे जमाना जाने...
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