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बाल संस्कार केन्द्र के बच्चे कैसे स्वागत करें नूतन वर्ष

बाल संस्कार केन्द्र के बच्चे कैसे स्वागत करें नूतन वर्ष

आपने बाल संस्कार में नूतन वर्ष की महिमा सुनी । नये वर्ष के दिन हम जैसे रहते हैं,हमारा पूरा साल वैसे ही बीतता है ।आपको याद आया कि पूज्य बापूजी सत्संग में बताते हैं कि सुबह 3 से 5 के बीच जो प्राणायाम करते हैं उनका प्राणबल,मनोबल और बुद्धिबल बढ़ता है । पूज्य बापूजी जैसी दिनचर्या बताते वैसे आपने अपनी दिनचर्या बनायी । 
आपने उस दिन नियम लिया कि मैं रोज 4.30 से 5.00 के बीच प्राणायाम करूँगा । 
नये साल के दिन आपने जप-ध्यान आदि किया । 
माता-पिता और बड़ों को प्रणाम करके आपने दिन की शुरूआत की । 
घर के दरवाजे में नीम और अशोक के पत्तों की बंधनवार लगाया।
नीम के 21 कोमल-कोमल पत्ते और 1 काली मिर्च 15 दिन तक खाने का नियम लिया । 
आपने उस दिन संकल्प किया बीते हुए वर्ष में जाने-अनजाने जो गलतियाँ हुई हैं उसे दुबारा ना दोहराकर सही मार्ग पर चलूँगा और पूज्य बापूजी से प्रार्थना की कि ‘हमारा जीवन मधुमय हो, हमारा व्यवहार व वाणी मधुमय हो, हमारी प्रत्येक चेष्टा मधुमय हो, ईश्वर की ओर ले जानेवाली हो ।
आपने सबको मंगलमय दिवस की शुभकामनाएँ दी । आप सदा प्रसन्न,उत्साही,ताजगीपूर्ण रहे,थकावट बिल्कुल महसूस ही नहीं हुई । आपको तब समझ आया कि भारतीय संस्कृति का एक-एक त्यौहार हमें जीवन में प्रसन्न, उत्साही रहने की सीख देता है ।

✒प्रश्न : सुबह 3 से 5 के बीच प्राणायाम करने से क्या लाभ होता है ?

📚बाल संस्कार पाठ्यक्रम-मार्च
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