Stories Search

पूज्यश्री की ‘सर्वभूतहिते रतः' दृष्टि

पूज्यश्री की ‘सर्वभूतहिते रतः' दृष्टि

एक बार पूज्य बापूजी सेवक से बोले : ‘‘आज उबटन से नहायेंगे, बहुत दिन हो गये उबटन से नहाये हुए ।

कुटिया में जो उबटन था उसमें घुन पड़ गये थे। 
बापूजी को सेवक ने बताया कि ‘‘उबटन में घुन पड़ गये हैं । 
‘‘लाओ,दिखाओ कितने घुन हैं ? देखा तो ढेर सारे थे।

बापूजी बोले : ‘‘इसको फेंकना नहीं,इसको ऐसा-का-ऐसा रख दो। इनको खाने-पीने दो, जीने दो। फिर बापूजी ने ऐसे ही स्नान किया।

 आमतौर पर किसी चीज में कीड़े आदि पड़ जाते हैं तो लोग उसे तत्काल फेंक देते हैं परंतु उससे कितने ही जीव-जंतुओं का जीवन पोषित हो सकता है ऐसी हितदृष्टि तो सर्वभूतहिते रतः बापूजी जैसे महापुरुषों की ही होती है।

📚बाल संस्कार पाठ्यक्रम
Previous Article बच्चों पर तो वे जल्दी खुश होते है
Next Article आदर्श-दिनचर्या
Print
496 Rate this article:
5.0
Please login or register to post comments.
RSS