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विफलता में भी सफलता छुपी है

विफलता में भी सफलता छुपी है

पूरा विज्ञान-जगत थॉमस अल्वा एडिसन का नाम बहुत अच्छे से जानता है। एडिसन बल्ब का तंतु बनाने के लिए पदार्थों का परीक्षण कर रहे थे। पहला,दूसरा,तीसरा, चौथा... ऐसा करते करते उन्होंने १००० पदार्थों का परीक्षण कर डाला परंतु सफलता हासिल न हई । आखिर उनका सहयोगी थककर बोल उठा : "हम व्यर्थ
ही प्रयास किये जा रहे हैं। सारी मेहनत बिना कुछ सीखे पानी में जा रही है।"

तब एडिसन ने मुस्कराकर कहा “मित्र ! तुम कैसे कह सकते हो कि हमने कुछ नहीं सीखा ? इन परीक्षणों से हमने यह तो सीख ही लिया कि १००० ऐसे पदार्थ हैं, जिनका उपयोग तंतु बनाने में नहीं किया जा सकता । गलतियाँ भी हमें बहुत कुछ सिखा जाती है।" कैसा सकारात्मक नजरिया है! सहयोगी उनकी बात सुनकर दंग रह गया कि कैसा सफलता का खोजी है, जो विफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे भी सीख ले रहा है ! 

एक रात्रि को उनकी प्रयोगशाला में आग लगी और सब जलकर खाक हो गया। सुबह एडिसन ने उसी राख के ढेर पर खड़े होकर अपनी डायरी में लिखा : दैवी प्रकोप की भी अपनी कीमत होती है। इस भयंकर आग में मेरी सिद्धियों के साथ मेरी गलतियाँ भी जल गयीं । ईश्वर का आभार है कि अब सब नये सिरे से शुरू हो सकेगा ।' सब कुछ भस्म करनेवाली आग उनके उत्साह को भस्म न कर सकी । सकारात्मक सोच रखनेवाले के शब्दकोश में हताशा-निराशा असम्भवता के लिए स्थान ही कहाँ ! ऐसे व्यक्ति मार्ग में आनेवाले अवरोधों को सीढ़ी बनाकर सफलता के शिखर पर अवश्य पहुँच जाते हैं। एडिसन ने भी अपने अथक प्रयास सतत जारी रखे तो बल्ब के आविष्कार का यश आज उनके नाम पर दर्ज है। यदि ऐसे व्यक्तियों को सत्संग मिल जाये तो वे अपने स्वरूप की खोज करके अपना और सृष्टिकर्त्ता का ज्ञान-प्रकाश भी प्राप्त कर सकते हैं और जगत में फैला सकते हैं।

📚लोक कल्याण सेतु/अप्रैल २०१३
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