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जीवन में सफलता कैसे पाएं

जीवन में सफलता कैसे पाएं

"उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत्।।"

▪विद्यार्थियों को अपने जीवन को सदैव बुरे संग से बचाना चाहिए। न तो वह स्वयं धूम्रपानादि करे, न ही ऐसे मित्रों का संग करें। व्यसनों से मनुष्य की स्मरणशक्ति पर बड़ा खराब प्रभाव पड़ता है। 

▪व्यसन की तरह चलचित्र भी विद्यार्थी की जीवनशक्ति को क्षीण कर देते हैं। आँखों की रोशनी को कम करने के साथ ही मन और दिमाग को भी कुप्रभावित करने वाले चलचित्रों से विद्यार्थियों को सदैव सावधान रहना चाहिए। यदि विद्यार्थी ने अपना विद्यार्थी-जीवन सँभाल लिया तो उसका भावी जीवन भी सँभल जाता है क्योंकि विद्यार्थी-जीवन ही भावी जीवन की आधारशिला है। 

▪विद्यार्थीकाल में वह जितना संयमी,सदाचारी,निर्भय और सहिष्णु होगा, बुरे संग तथा व्यसनों को त्यागकर सत्संग का आश्रय लेगा,प्राणायाम-आसनादि को सुचारु रूप से करेगा उतना ही उसका जीवन समुन्नत होगा। यदि नींव सुदृढ़ होती है तो उस पर बना विशाल भवन भी दृढ़ और स्थायी होता है। विद्यार्थीकाल मानव-जीवन की नींव के समान है, अतः उसको सुदृढ़ बनाना चाहिए। इन बातों को समझकर उन पर अमल किया जाय तो केवल लौकिक शिक्षा में ही सफलता प्राप्त होगी ऐसी बात नहीं है वरन् जीवन की हर  परीक्षा में विद्यार्थी सफल हो सकता है। हे 

✍🏻विद्यार्थियों ! उठो.... जागो... कमर कसो। दृढ़ता और निर्भयता से जुट पड़ो। बुरे संग तथा व्यसनों को त्यागकर संतों-सदगुरुओं के मार्गदर्शन के अनुसार चल पड़ो... सफलता तुम्हारे चरण चूमेगी।

धन्य हैं वे लोग जिनमें ये छः गुण हैं ! अंतर्यामी देव सदैव उनकी सहायता करते हैं-

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। 
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत्।।

उद्योग, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम – ये छः गुण जिस व्यक्ति के जीवन में हैं, देव उसकी सहायता करते हैंʹ
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