Stories Search

विद्यार्थी सुधरे तो भारत सुधरा

विद्यार्थी सुधरे तो भारत सुधरा

विद्यार्थियों को चाहिए कि अपने चरित्र पर ध्यान दें। धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ-कुछ किंतु चरित्र गया तो सब कुछ गया।

विद्यार्थी सत्यनिष्ठ, स्नेही, साहसी व निर्मल स्वभाववाला तो सहज में हो सकता है लेकिन कुसंग के कारण अपना सर्वनाश कर देता है। गंदी, चरित्र भ्रष्ट करने वाली फिल्मों के द्वारा चरित्र बिगड़ता है। गंदे विज्ञापन, उपन्यास, चरित्र भ्रष्ट करने वाला साहित्य और संग बंद हो जाय तो राम राज्य हो जाय।

गंदे सिनेमा ने तो सत्यानाश कर दिया है। देखो कि इस सिनेमा से कितने घर बरबाद हो गये हैं। बुरे चित्र एवं वासनाओं से भरे गाने चित्त को कितना खराब करते हैं ! मन खराब तो शरीर खराब। पैसे भी दो और बीमारियाँ भी लो, ऐसे सिनेमा से क्या लाभ ! आजकल केवल पैसे कमाने के लिए बुरी-बुरी से फिल्म का निर्माण करके लोगों का खाना-खराब किया जा रहा है।

एक बार विनोबा को सिनेमा में ले गये। वहाँ बुरे चलचित्र दिखाने लगे तो विनोबा दरी बिछा कर सो गये। तुम भी ऐसी फिल्म न देखो। सिनेमा देखने से विचार, संकल्प खराब होते हैं।

विद्यार्थियों को चाहिए कि अपने चरित्र पर ध्यान दें। धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ-कुछ गया किंतु चरित्र गया तो सब कुछ गया।

अतः चरित्र ही है जो मनुष्य को बनाता है।

पूज्यपाद भगवत्पाद साँईं श्री श्री लीलाशाह जी महाराज
Print
3508 Rate this article:
4.5
Please login or register to post comments.
RSS