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एकाग्रता कैसे बढ़े

एकाग्रता कैसे बढ़े

एकाग्रता पाना कोई कठिन बात नहीं है लेकिन जैसा काम होता है उसके लिए वैसा समय और उत्साह चाहिए। लगनपूर्वक अभ्यास करें। शुरुआत में एकाग्रता न भी हो लेकिन धीरे-धीरे लाभ होने लगेगा। कुछ ही समय में एकाग्रता के अनुभव होने लगेंगे।

-पूज्य बापू जी की परम हितकारी अमृतवाणी

शरीर स्वस्थ रहे एवं एकाग्रता साध सकें इसके लिए पहले 8-10 अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने चाहिए। फिर नासाग्र दृष्टि रखकर धीरे-धीरे श्वास को निहारें। इससे धीरे-धीरे श्वास की गति मंद होगी और एकाग्रता जल्दी हासिल होगी।

एकाग्रता के लिए त्राटक एक महत्त्वपूर्ण प्रयोग। त्राटक का अर्थ है किसी निश्चित आसन पर बैठकर भगवान, गुरु या स्वस्तिक को एकटक देखना।

कभी-कभी किसी नदी, सरोवर अथवा सागर के किनारे चले जायें एवं उसकी लहरों को निहारें। धीरे-धीरे वृत्तियाँ शांत होने लगेंगी, एकाग्रता बढ़ेगी।

हो सके उतना अधिक मौन रखें। वाणी कम खर्च होगी तो शक्ति बचेगी और वह शक्ति एकाग्रता में काम आयेगी।

प्रभात का ध्यान बड़ी मदद करता है। सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान करके पूर्वाभिमुख होकर बैठ जायें, गहरे श्वास लें और प्रणव (ૐ) का उच्चारण करें।

एकाग्रता करने से पूर्व सत्साहित्य पढ़ें, जो बल दे, पवित्र निर्भयता दे और एकाग्रता के लिए उत्साह दे। पहले 10 दिन तक ʹ20 मिनट तो बैठना ही है।ʹ फिर धीरे-धीरे 25, 30, 40, 45.... मिनट बढ़ाते-बढ़ाते एक घंटे तक पहुँच जायें। कुछ महीनों में एकाग्रता के अनुभव होने लगेंगे।

संत-दर्शन व सत्संग-श्रवण को बढ़ाने के सर्वश्रेष्ठ उपाय हैं। तन्मय होकर सत्संग सुनने से चंचल-से-चंचल चित्त भी ऐसा एकाग्र हो जाता है कि वैसा एकाग्र वह अन्य किसी उपाय से नहीं होता।
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