तुलसी पूजन दिवस क्यों
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तुलसी पूजन दिवस क्यों

२५ दिसम्बर से १ जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, युवाधन की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं । इसलिए प्राणिमात्र का मंगल एवं भला चाहने और करने वाले पूज्य बापूजी ने वर्ष २०१४ में आवाहन किया था : ‘‘२५ दिसम्बर से १ जनवरी तक तुलसी-पूजन, जप-माला पूजन, गौ-पूजन, हवन, गौ-गीता-गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित हों, जिससे सभीकी भलाई हो, तन तंदुरुस्त व मन प्रसन्न रहे तथा बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रसाद प्रकट हो । गौ, गंगा, तुलसी से ओजस्वी-तेजस्वी बनें व गीता-ज्ञान से अपने मुक्तात्मा, महानात्मा स्वरूप को जानें ।''

तुलसी ‘माताङ्क के रूप में अति पवित्र एवं पूजनीय मानी गयी है । तुलसी आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक - तीनों प्रकार के तापों का नाश कर सुख-समृद्धि देनेवाली है । तुलसी पूजन, सेवन व रोपण से आरोग्य-लाभ, आर्थिक लाभ के साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी होते हैं । पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘‘तुलसी के होने से घर में धन, पुत्र, पुण्यदायी वातावरण के साथ हरिभक्ति प्राप्त होती है ।''
अतः देश में सुख, सौहार्द, स्वास्थ्य, शांति से जन-समाज का जीवन मंगलमय हो इस लोकहितकारी उद्देश्य से प्राणिमात्र के हितqचतक पूज्य बापूजी की पावन प्रेरणा से वर्ष २०१४ से २५ दिसम्बर को ‘तुलसी पूजन दिवसङ्क मनाना प्रारम्भ हुआ । इस पर्व की लोकप्रियता विश्वस्तर पर देखी गयी । तुलसी पूजन से बुद्धिबल, मनोबल, चारित्र्यबल व आरोग्यबल ब‹ढता है । मानसिक अवसाद, दुव्र्यसन, आत्महत्या आदि से लोगों की रक्षा होती है और लोगों को भारतीय संस्कृति के इस सूक्ष्म ऋषि-विज्ञान का लाभ मिलता है ।


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