आदर्श भक्त हनुमानजी
Next Article सच्चा सम्राट
Previous Article प्राणिमात्र की आशाओं के राम

आदर्श भक्त हनुमानजी

श्री हनुमानजी को ज्ञानियों में श्रेष्ठ और वीरों में अद्वितीय शक्तिशाली कहा जाता है उनका जीवन पुरुषार्थ, साहस, संयम, सदाचार, भक्ति और निष्काम सेवा की प्रेरणा देता है

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।

हनुमानजी जाग्रत देव, सात चिरंजीवियों में से एक, बाल ब्रह्मचारी, महान वीर, सर्वथा निर्भय, सत्यवादी, स्वामिभक्त, अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता तथा विद्या, बुद्धि, ज्ञान और पराक्रम की मूर्ति हैं

श्रीराम-कार्य में कितने भी विघ्न या प्रलोभन आयें, उन पर विजय प्राप्त करते हुए हनुमानजी आगे ही बढते रहे इतने सद्गुण होने पर भी अभिमान तो उन्हें छू तक नहीं पाया जब हनुमानजी माता सीता का पता लगाकर व अकेले लंका को जलाकर भगवान श्रीरामजी के पास वापस आये, तब भगवान ने पूछा ...

‘‘हनुमान ! त्रिभुवनविजयी रावण की लंका को तुमने कैसे जला दिया?

हनुमानजी ने उत्तर में कहा ...

सो सब तव प्रताप रघुराई नाथ कछू मोरि प्रभुताई ।।  (श्रीरामचरित. सुं.कां. ... ३२.)

यह सब तो हे श्रीरघुनाथजी ! आप ही का प्रताप है हे नाथ ! इसमें मेरी प्रभुता (बडाई) कुछ भी नहीं है

कैसी अनन्य निष्ठा और अतुलनीय भक्ति है पवनसुत हनुमानजी की !

Next Article सच्चा सम्राट
Previous Article प्राणिमात्र की आशाओं के राम
Print
14999 Rate this article:
4.5
Please login or register to post comments.
RSS
1345678910Last