जीवनयात्रा
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जीवनयात्रा

आसुमल से हो गये साँर्इं आशाराम...

अलख पुरुष की आरसी, साधु का ही देह ।

लखा जो चाहे अलख को, इन्हींमें तू लख लेह ।।

      किसी भी देश की सच्ची सम्पत्ति संतजन ही होते हैं । विश्व के कल्याण के लिए जिस समय जिस धर्म की आवश्यकता होती है, उसका आदर्श उपस्थित करने के लिए स्वयं भगवान ही तत्कालीन संतों के रूप में नित्य अवतार लेकर आविर्भूत होते हैं । वर्तमान युग में यह दैवी कार्य जिन संतों द्वारा हो रहा है, उनमें एक लोकलाडले संत हैं श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ योगिराज पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ।

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